Sunday, November 21, 2010

bhrashtachaar (corruption)

कल टी वी देखते देखते एक headlines पर नज़र पड़ी कि आजकल भ्रष्टाचार को मुद्दा क्यों नहीं बनाते लोग ? क्या हमने भ्रष्टाचार को अपने जीवन का एक हिस्सा मान लिया   है ? मेरा जवाब येही है की भ्रष्टाचार की शुरुवात करने वाले कोई मंत्री या नेता नहीं थे बल्कि यह भ्रष्टाचार शुरू किया है हमने, जनता ने. जैसे जैसे लोगों की माली हालत सुधरती जा रही वैसे वैसे लोग आलसी होते जा रहे हैं या लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इतने व्यस्त हैं, इतने बीजी हैं कि अपना काम आसानी से हो जाए और इसके लिए वोह कुछ भी पैसा लुटाने को हिचकिचाते नहीं हैं. घर में गैस का सिलिंडर ख़तम हो गया और बाज़ार में गैस की किल्लत चल रही है, तो हम गैस डेलिवेरी करने वाले को पचास सौ रुपये ऊपर से देकर सिलिंडर मंगा  लेते हैं.  हमारा तो काम हो गया लेकिन उस डेलिवेरी करने वाले ने खून चख लिया है और अगर आपने उसे १०० रुपये ऊपर से दिए हैं तो वोह अगले मजबूर ग्राहक से १५० की उम्मीद करेगा और ये सिलसिला शुरू हो जाता है. मुंबई में आदर्श सोसाइटी की बिल्डिंग जो कि कारगिल जवानों के लिए आरक्षित ज़मीन पर बनी है को घोटाला और दिल्ली  में Commonwealth Games में घोटाला दो बहुत ही हाल ही के भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं, लेकिन मैं इन घोटालों पर टिप्पणि करने वाला expert नहीं हूँ, मेरा सवाल यह है कि मुझसे और आम आदमी से कहा जाता है की मैं मतदान ज़रूर करूँ और अगर मैं मतदान नहीं करता तो मुझे कोई हक नहीं है किसी के खिलाफ कुछ भी शिकायत करने का. लेकिन अगर मैं मतदान करता हूँ और मैंने अब तक तो किया ही है , तो मुझे क्या गारंटी दी जाती है की जिस उमीदवार को मैं अपन मत दे रहा हूँ वोह आगे जाकर कोई गड़बड़ नहीं करेगा, रिश्वतखोरी नहीं करेगा. कोई इस बात की मुझे लिखित गारंटी देने को तैयार है? हालाँकि Ashok Chavan और Suresh Kalmadi पर अभी इलज़ाम साबित होने बाकी हैं, लेकिन इनका नाम तो भ्रष्टाचारियों और रिश्वतखोरों में शामिल हो ही गया है, तो उन मतदाताओं का क्या जिन्होंने इन लोगों को मत देकर चुना ? क्या उनके साथ धोखा नहीं हुआ है? घंटों मतदान केंद्र के बाहर खड़े होकर अपने सुनहरे भविष्य की कल्पना करते हुए इन्होने इन दोनों को और ऐसे कई भ्रष्ट नेताओं को अपना कीमती मत दिया लेकिन बदले में उन्हें क्या मिला? मैंने राजनीती में कोई महारत हासिल नहीं की, मैं भी उन लाखों करोड़ों लोगों में से एक हूँ जिसे अपनी दो वक़्त की रोटी जुटाने की फिकर है. बस मेरा एक ही सुझाव है की हर उम्मीदवार के लिए यह अनिवार्य किया जाए की वोह अपने चुनाव क्षेत्र के हिसाब से एक बैंक गारंटी दे कि अगर उसने कुछ गड़बड़ की तो अपनी ज़मीन जायदाद बेचकर उन पैसों को अपने मतदाताओं में बाँट देगा चाहे किसी मतदाता ने उसे वोट दिया है या नहीं. और अंत में मैं यही कहूँगा की अगर हम यानी कि आम जनता रिश्वत खिलाना छोड़ दे तो भ्रष्टाचार अपने आप ख़तम हो जायेगा. बस थोड़े से त्याग और संयम की ज़रुरत है. xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

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